''हर क्रांति पुराने समाज को ध्वस्त कर देती है और उस हद तक वह सामाजिक होती है. हर क्रांति पुराणी सत्ता को उखाड़ फेंकती है और उस हद तक वह राजनीतिक होती है .''...............................''सभी देशों के मजदूरों के हित, उनके दुश्मन और उनका संघर्ष एक समान है. मजदूरों का विशाल बहुमत अपने स्वभाव से राष्ट्रवादी पूर्वाग्रहों से मुक्त होता है. उसकी पूरी बनावट व आन्दोलन लाजिमी तौर पर मानवतावादी होता है तथा वह संकुचित राष्ट्रवाद का विरोध करता है. केवल सर्वहारा वर्ग ही संकुचित राष्ट्रवादी भावना को ध्वस्त करके जन जागरण का वह प्रकाश आलोकित कर सकता है जिससे सभी राष्ट्रों के बीच भाईचारे का पुष्प खिल सके.
- मार्क्स-एन्गेल्स
Hamain jankar khushi hui ki app jese log revolution ke liye kam karte hain.jisse samaz, bikaas ka agla kadam rakhega or manvbadi samaz ki sthapna ho sakegi, or har prakar ke sosan,dohan,daman or gulami ka ant hoga.
ReplyDeleteek mazdoor